Wednesday, June 10, 2020

Mangal panday की जीवनी | मंगल पाण्डेय की जीवनी

मंगल पाण्डेय जीवनी | Mangal panday jivni

मंगल पाण्डेय एक भारतीय सैनिक थे | उन्होंने 1857 में विद्रोह के बाद के घटनाक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी | वह भारत में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की 34वी बंगाल नेटिव इंफेंटरी रेजिमेंट में एक सिपाही थे | 1984 में भारत सरकार ने उन्हें याद करने के लिए एक डाक टिकट भी जारी किया उनको भारतीय इतिहास में प्रथम स्वतंत्रता सेनानी और 1857 के शहीद के रूप में पेश किया गया | उन्हें लोकप्रिय रूप से शहीद मंगल पांडेय के नाम से जाना जाता है | उन्होंने राष्ट्र के लिए लड़ने के लिए भारतीय जनता को जगाया || 

मंगल पाण्डाडेय डाक टिकट
मंगल पाण्डेय जन्मदिन और मुत्यु


मंगल पांडेय 

जन्म: 19 जुलाई 1827 
नगवा, बलिया,(भारत)
मृत्यु:   8 अप्रैल 1857 
बैरकपुर भारत 
व्यसाय:  बैरकपुर छावनी में बंगाल नेटिव इन्फैण्ट्री की 34वीं रेजिमेंट में सिपाही 
प्रसिद्धि कारण:   भारतीय स्वतन्त्रता सेनानी
धार्मिक मान्यता:  हिन्दू

जन्म स्थान

मंगल पांडेय का जन्म 19 जुलाई, 1827 को उत्तर प्रदेश के जिला बलिया के गांव नगवा में हुआ था उनका जन्म "भूमिहार व्राह्मण परिवार में हुआ था उनके पिता जी का नाम दिवाकर पांडेय था | जंगीदार व्राह्मण को भूमिहार कहा जाता है भूमिहार व्राह्मण होने के बाद भी मंगल पांडेय सन 1849 में 22 साल की उम्र में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में शामिल हो गए ||

1857 का विद्रोह 

विद्रोह का प्रारम्भ एक बन्दूक से हुआ था सिपाहीओं को पेटेंट 1853 एनफील्ड बन्दूक दी गई जो की 0.577 कैलिबर की बन्दूक थी तथा पुराणी और कई दशकों से उपयोग में लाई जा रही थी जो की अचूक और ब्राउन ब्रेस के मुकाबले ज्यादा शक्तिशाली थी नई बन्दूक में गोली दागने की आदुनिक प्रणाली (प्रीक्षण कैप) का प्रयोग किया गया था परन्तु बन्दूक में गोली भरने की प्रक्रिया पुराणी थी | नई एनफील्ड बन्दूक को भरने के लिए कारतूस को दाँतों से काट कर खोलना पड़ता था और उसमें भरे हुए बारूद को बन्दूक की नली में भर कर कारतूस को डालना पड़ता था कारतूस के बाहरी हिस्से में चर्बी होती थी जो की उसे पानी की सील से बचाती थी | सिपाहियों के बीच अफवाफ फ़ैल चुकी थी के कारतूस में लगी हुई चर्बी सूअर और गाय के मॉस से बनाई जाती है 

मंगल पाण्डेय की गन
एनफील्ड बन्दूक 

29 मार्च 1857 को बैरक पुर परेड मैदान कलकत्ता के निकट मंगल पांडेय ने दुगवा रहीमपुर (फैजाबाद) के रहने वाले रेजिमेंट के अफसर भाग के ऊपर हमला कर के उसको ज़ख़्मी कर दिया | जनरल हेयरसेये के अनुसार मंगल पांडेय किसी प्रकार के धार्मिक पागलपन में थे | जनरल ने जमादार ईश्वरी प्रसाद को मंगल पांडेय को गिरफ्तार करने का आदेश दिया | पर जमादार ने मना कर दिया सिवाए एक सिपाही शेख पलटू को शोड कर बाकि सारी रेजिमेंट ने मंगल पांडेय को गिरफ्तार करने से मना कर दिया | मंगल पांडेय ने आपने साथियों को खुले आम विद्रोह करने के लिए कहा पर किसी के न मानने पर उन्होंने आपने आप को मारने का प्रयास किया | पर इसमें वो घायल हो गए | 4 अप्रैल को मंगल पांडेय का कोर्ट मार्शल कर दिया गया और 8 अप्रैल को फांसी दे दी गई  

No comments:

Post a Comment

if you have any doubt, Please let me know

Mangal panday की जीवनी | मंगल पाण्डेय की जीवनी

मंगल पाण्डेय जीवनी | Mangal panday jivni मंगल पाण्डेय एक भारतीय सैनिक थे | उन्होंने 1857 में विद्रोह के बाद के घटनाक्रम में महत्वपूर्ण भ...